क़ोरबा, छत्तीसगढ़। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के दीपका और गेवरा परियोजना क्षेत्रों में भू-विस्थापित किसानों एवं आउटसोर्सिंग कंपनियों के मजदूरों से जुड़े मामलों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विभिन्न किसान संगठनों, श्रमिक प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि रोजगार, उचित मुआवजा, पुनर्वास तथा श्रमिक अधिकारों की मांग करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, लीगल नोटिस और एफआईआर का सहारा लेकर आंदोलनों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
इन आरोपों के केंद्र में SECL दीपका के पूर्व एवं वर्तमान गेवरा मुख्य महाप्रबंधक (CGM) संजय कुमार मिश्रा का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।दीपका के बाद गेवरा में भी वही कार्यशैली अपनाने का आरोपस्थानीय लोगों का कहना है कि दीपका परियोजना के दौरान जिन तरीकों से आंदोलनों को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया था, उसी प्रकार की रणनीति अब गेवरा क्षेत्र में भी अपनाई जा रही है।

उनका आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों पर कानूनी दबाव बनाया जा रहा है, जिससे आंदोलन की आवाज कमजोर पड़े।किसानों और मजदूरों की प्रमुख मांगेंभू-विस्थापित किसानों की मांगें—- अधिग्रहित भूमि के बदले उचित मुआवजा।- परिवार के पात्र सदस्यों को रोजगार।- पुनर्वास एवं बसाहट नीति का प्रभावी क्रियान्वयन।
आउटसोर्सिंग कंपनियों के मजदूरों की मांगें—-
HPC दर के अनुसार वेतन।-
PF, ESI एवं अन्य वैधानिक सुविधाएं।-
सुरक्षा उपकरण और पहचान पत्र।- नियमित चिकित्सा सुविधाएं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इन मांगों पर समाधान निकालने के बजाय उन्हें कानूनी विवादों में उलझाया जा रहा है।मलगांव मुआवजा प्रकरण पर भी उठे सवालप्रेस को जारी बयान में मलगांव और अमगांव क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा वितरण प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
नराईबोध, भिलाईबाजार और रलिया के ग्रामीणों में बढ़ी चिंतास्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि भविष्य में इन गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होती है तो बिना स्पष्ट पुनर्वास नीति, रोजगार और उचित मुआवजे के वे अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे मलगांव जैसी परिस्थितियां दोबारा नहीं दोहराने देंगे।
संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनीकिसान एवं श्रमिक संगठनों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि विकास के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
प्रबंधन का पक्ष अपेक्षितइस संबंध में SECL प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

