सिरकी मोड़ से तिवरता के बीच समय-समय पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन जांच अभियान चलाया जाता है। इस दौरान ट्रक चालकों की ड्रिंक एंड ड्राइव जांच की जाती है तथा दोपहिया और चारपहिया वाहनों के दस्तावेज, ड्राइविंग लाइसेंस, हेलमेट, सीट बेल्ट आदि की भी जांच की जाती है। सामान्यतः महीने में एक-दो बार इस प्रकार की कार्रवाई देखने को मिलती है।
लेकिन इससे एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है। यह पूरा क्षेत्र एशिया के सबसे बड़े कोयला खनन क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जहाँ दिन-रात भारी संख्या में विशालकाय हाइवा, डंपर और ट्रक चलते हैं। इन्हीं भारी वाहनों के बीच आम नागरिक अपनी दोपहिया या चारपहिया गाड़ियों से रोजमर्रा के कार्यों के लिए सफर करते हैं। ऐसे में सड़क दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता नियमित ट्रैफिक प्रबंधन है। जाम लगने पर घंटों तक वाहन फंसे रहते हैं। स्कूल, अस्पताल, कार्यालय या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए निकलने वाले नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस तैनात रहे, तो जाम और दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।
कई नागरिक यह भी महसूस करते हैं कि ट्रैफिक पुलिस की उपस्थिति अधिकतर जांच अभियानों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि नियमित यातायात संचालन और जाम प्रबंधन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। यदि ऐसा अनुभव व्यापक है, तो संबंधित विभाग को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और अपनी प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी चाहिए।
यह भी विचारणीय है कि क्षेत्र में पहले से सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संख्या में CISF के जवान तैनात हैं। यदि कानून और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप संभव हो, तो विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि, यातायात प्रवर्तन और नियंत्रण का दायित्व संबंधित सक्षम प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही निर्धारित होता है।
कोयलांचल जैसे अति व्यस्त औद्योगिक क्षेत्र में केवल समय-समय पर वाहन जांच अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि सिरकी मोड़, तिवरता, दीपका, गेवरा तथा अन्य संवेदनशील मार्गों पर नियमित ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, जाम की समस्या कम होगी और आम नागरिक अधिक सुरक्षित वातावरण में आवागमन कर सकेंगे।
अब समय आ गया है कि जनप्रतिनिधि, प्रशासन, पुलिस विभाग और स्थानीय नागरिक मिलकर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान तलाशें, ताकि यातायात व्यवस्था केवल चालान और जांच तक सीमित न रहकर वास्तव में जनसुरक्षा का माध्यम बन सके।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

