मन में लगातार चलने वाले नकारात्मक विचार वर्तमान समय में अनेक समस्याओं और तनाव का प्रमुख कारण बनते हैं। तनाव से मुक्ति के लिए सकारात्मक विचारों का होना आवश्यक है।
सकारात्मक सोच से सहनशीलता विकसित होती है, जिससे कई समस्याओं का समाधान संभव हो जाता है। मन के विचारों का प्रभाव वातावरण, पेड़-पौधों, दूसरों तथा स्वयं पर भी पड़ता है। सकारात्मक विचारों के माध्यम से ही हम स्वयं और समाज की रक्षा कर सकते हैं, जबकि नकारात्मक विचार अनेक शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों का कारण बनते हैं।

उक्त विचार ब्रह्माकुमारी संस्था के मुख्यालय माउंट आबू (राजस्थान) से पधारे ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने व्यक्त किए। वे सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों को “सकारात्मक चिंतन से तनाव मुक्ति” विषय पर संबोधित कर रहे थे।भगवान भाई ने कहा कि सकारात्मक रहने से हर समस्या का समाधान निकलता है।

बुराई में भी अच्छाई देखने का प्रयास करने से मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मन में उत्पन्न विचारों से ही स्मृति, वृत्ति, भावना, दृष्टिकोण और व्यवहार निर्मित होता है। यदि विचार नकारात्मक होंगे तो उसका प्रभाव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र पर दिखाई देगा और तनाव उत्पन्न होगा।उन्होंने कहा कि मन के नकारात्मक विचार तन और मन दोनों में थकावट पैदा करते हैं।

जिससे व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होने लगता है। तनाव के कारण क्रोध बढ़ता है तथा व्यक्ति को शांतिपूर्ण नींद भी नहीं मिल पाती।भगवान भाई ने सकारात्मक विचारों को तनाव मुक्ति की “संजीवनी बूटी” बताते हुए कहा कि विकारों के प्रभाव में आने से तनाव उत्पन्न होता है, इसलिए स्वयं को विकारों से बचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों का मूल स्रोत आध्यात्मिकता है और वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को सकारात्मक बनाने की आवश्यकता है।उन्होंने यह भी कहा कि तनाव के कारण व्यक्ति नशा और अन्य बुरी आदतों की ओर आकर्षित हो सकता है, जिससे जीवन में गलत निर्णय और भूल होने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
इस अवसर पर डिप्टी कमांडर संजय प्रसाद शर्मा ने कहा कि सकारात्मक विचारों का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ता है। उन्होंने सभी को मानसिक एवं शारीरिक रूप से मजबूत बनकर समाज और देश की सेवा करने का संदेश दिया।सहायक कमांडर प्रभुनाथ यादव ने कहा कि सकारात्मक सोच जीवन को सफलता की ओर ले जाती है, इसलिए हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।स्थानीय ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से बी.के. सूरज बहन ने कहा कि राजयोग के नियमित अभ्यास से मनोबल और आत्मबल में वृद्धि होती है।
उन्होंने “हम कौन हैं, परमात्मा कौन हैं” तथा राजयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी तनाव से गुजर रहा है और राजयोग इसके समाधान का एक माध्यम बन सकता है।कार्यक्रम में बी.के. टीबी भाई, बी.के. डॉ. पूर्णा बहन, टेक बहादुर भाई तथा सशस्त्र सीमा बल के जवान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बी.के. डॉ. पूर्णा बहन ने किया तथा संस्था का परिचय भी दिया। अंत में भगवान भाई ने उपस्थित सभी लोगों को मनोबल एवं आत्मबल बढ़ाने के लिए राजयोग का अभ्यास कराया।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.




