दीपका, कोरबा। कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में आम नागरिकों के सुरक्षित आवागमन के उद्देश्य से बनाया गया लोहे का पुल आज अपनी उपयोगिता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस पुल का निर्माण गौरव पथ को सुरक्षित तरीके से पार करने के लिए किया गया था, उसका इस्तेमाल वर्तमान में आम नागरिक बहुत कम कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप लोग दोपहिया वाहन, चारपहिया वाहन अथवा पैदल ही गौरव पथ के नीचे से जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं।

न दोपहिया के काम आया, न चारपहिया के
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुल का निर्माण यदि इस तरह किया जाता कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का भी सुरक्षित आवागमन संभव हो, तो यह वास्तव में आम जनता के लिए उपयोगी साबित हो सकता था। वर्तमान व्यवस्था में वाहन चालकों के लिए पुल का इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है। कोई दोपहिया या चारपहिया वाहन लेकर गौरव पथ पार करने वाला व्यक्ति अपनी गाड़ी नीचे खड़ी करके केवल पैदल पुल पर चढ़कर दूसरी ओर जाने के लिए तैयार नहीं होगा। यही कारण है कि पुल के बावजूद बड़ी संख्या में लोग नीचे से ही गौरव पथ पार करते दिखाई देते हैं।

पैदल राहगीरों के लिए भी पुल तक पहुंचने और फिर दूसरी ओर उतरने की प्रक्रिया लंबी एवं असुविधाजनक बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दूर से पुल पर चढ़ने और फिर दूसरी ओर जाकर उतरने की बजाय लोग गौरव पथ को सीधे पार करना आसान समझते हैं, भले ही इसमें जोखिम क्यों न हो।‘सफेद हाथी’ बनकर रह गया लोहे का पुलस्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिस उद्देश्य से पुल का निर्माण किया गया था, वह उद्देश्य आज तक पूरी तरह हासिल नहीं हो सका है। पुल का उपयोग सीमित होने के कारण इसे क्षेत्रवासी अब ‘सफेद हाथी’ कहने लगे हैं।

पुल की वर्तमान स्थिति भी रखरखाव के अभाव की ओर इशारा करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस सार्वजनिक निर्माण पर सरकारी/संस्थागत संसाधन खर्च हुए, उसका वास्तविक लाभ आम जनता को कितना मिल रहा है ?
निर्माण की उपयोगिता और खर्च की हो जांच
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा पुल के निर्माण में ठेकेदारी एवं संभावित कमीशन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए संबंधित विभाग/SECL को चाहिए कि पुल के निर्माण की लागत, टेंडर प्रक्रिया, कार्य की तकनीकी उपयोगिता, गुणवत्ता, भुगतान एवं वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब पुल बना असामाजिक गतिविधियों का कथित अड्डा ?
स्थानीय लोगों के बीच यह शिकायत भी सामने आ रही है कि आवागमन में कम इस्तेमाल होने के कारण पुल का सुनसान हिस्सा कथित तौर पर नशे का सेवन करने वाले युवाओं और प्रेमी जोड़ों के एकांत में बैठने का स्थान बन गया है। इन शिकायतों की भी प्रशासन द्वारा मौके पर जांच कराई जानी चाहिए। यदि वास्तव में यहां नशाखोरी अथवा अन्य असामाजिक गतिविधियां हो रही हैं तो सुरक्षा व्यवस्था एवं नियमित निगरानी की आवश्यकता है।

डिस्मेंटल करने की चर्चा, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं
स्थानीय चर्चाओं में पूर्व में यह बात सामने आई थी कि इस लोहे के पुल को भविष्य में डिस्मेंटल कर हटाया जा सकता है, लेकिन इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।यदि पुल को हटाने का निर्णय लिया गया है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? यदि हटाने का निर्णय नहीं हुआ है तो इसके उपयोग को बढ़ाने के लिए क्या योजना है ? इन सवालों पर संबंधित विभाग और SECL को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

गौरव पथ की हालत बरसात में और भी भयावह
लोहे के पुल की समस्या के साथ-साथ गौरव पथ की बदहाल स्थिति भी दीपका क्षेत्र की बड़ी जनसमस्या बन चुकी है।विशेषकर बारिश के मौसम में कोयला लदे भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क पर कोयले की परत और कीचड़ जमा होने से स्थिति और खराब हो जाती है। पानी पड़ने के बाद सड़क पर फिसलन बढ़ जाती है, जिससे पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्कूली बच्चों के जूते और ड्रेस हो रहे खराब
दीपका और गेवरा क्षेत्र में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रोजाना आवागमन करते हैं। कई बच्चे स्कूल जाने तथा स्कूल से वापस लौटने के दौरान गौरव पथ को पैदल अथवा साइकिल/दोपहिया के माध्यम से पार करते हैं।बारिश के दिनों में कीचड़ के कारण बच्चों के जूते, मोजे और स्कूल ड्रेस तक खराब हो जाते हैं। कई बार कीचड़ और फिसलन के कारण बच्चे गिरने से भी बाल-बाल बचते हैं।महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य पैदल राहगीरों के लिए भी ऐसी परिस्थितियां परेशानी का कारण बनती हैं।
बाइक फिसलने का बना रहता है खतरा
गौरव पथ पर कोयले की परत के ऊपर बारिश का पानी पड़ने से कीचड़नुमा स्थिति बन जाती है। ऐसे में दोपहिया वाहन का टायर अचानक स्लिप कर सकता है। पैदल चलने वालों के लिए भी फिसलन के कारण गिरने की आशंका बनी रहती है।एक छोटी सी चूक गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए किसी अनहोनी के बाद व्यवस्था सुधारने के बजाय पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम किए जाने की जरूरत है।
सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था भी जरूरी
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले गौरव पथ क्रॉसिंग के आसपास सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था दिखाई देती थी, लेकिन अब ऐसी व्यवस्था पर्याप्त रूप से नजर नहीं आती। भारी वाहनों की आवाजाही और स्कूली बच्चों के आवागमन को देखते हुए यहां सुरक्षा गार्ड/ट्रैफिक मार्शल, बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक एवं सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। SECL और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांगगौरव पथ की समस्या केवल सड़क की समस्या नहीं है, बल्कि यह स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, दोपहिया वाहन चालकों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय है।
SECL, नगर पालिका एवं जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर तत्काल व्यवस्था करनी चाहिए। गौरव पथ की नियमित सफाई, कोयले की परत हटाने, कीचड़ की सफाई, सड़क की मरम्मत, पानी निकासी, सुरक्षित क्रॉसिंग और यातायात नियंत्रण की स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए।साथ ही लोहे के पुल की तकनीकी उपयोगिता एवं वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन कर यह तय किया जाना चाहिए कि इसे उपयोगी बनाने के लिए सुधार किया जाए अथवा नियमानुसार हटाकर कोई अधिक व्यावहारिक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाए।
जनहित में जवाबदेही तय होना जरूरी
क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास कार्य केवल निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिस संरचना का निर्माण जनता के लिए किया गया है, वह वास्तव में जनता के लिए उपयोगी भी हो—यह सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
गौरव पथ की बदहाली और अनुपयोगी लोहे के पुल का मामला अब केवल स्थानीय परेशानी नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और सार्वजनिक धन के सदुपयोग से जुड़ा सवाल बन चुका है।प्रशासन को चाहिए कि किसी दुर्घटना का इंतजार किए बिना तत्काल संज्ञान लेकर गौरव पथ को सुरक्षित एवं व्यवस्थित करे और लोहे के पुल की उपयोगिता, निर्माण गुणवत्ता तथा वर्तमान स्थिति की जांच कराए।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

