कोरबा/दीपका।
देशभर में लाखों नागरिक वर्षों से जमीनी विवादों में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भूमि अभिलेखों की त्रुटियां, सीमांकन में अत्यधिक देरी, आधुनिक तकनीक का सीमित उपयोग तथा राजस्व मामलों के लंबित रहने के कारण आम नागरिकों को भारी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता उदय चौधरी ने कहा कि आज भी अनेक स्थानों पर भूमि अभिलेख पूरी तरह अद्यतन नहीं हैं। खसरा, बी-1, नक्शा एवं वास्तविक स्थिति में अंतर होने से विवाद उत्पन्न होते हैं। सीमांकन की प्रक्रिया में महीनों और कई बार वर्षों का समय लग जाता है, जिससे अवैध कब्जों और नए विवादों की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
उन्होंने कहा कि आज जब GPS, GIS, ड्रोन और डिजिटल मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, तब भी भूमि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीक आधारित नहीं हो पाई है। यदि पूरे देश में डिजिटल सीमांकन प्रणाली लागू कर दी जाए, तो भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
उदय चौधरी ने यह भी कहा कि भूमि विवादों में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यवाही अत्यंत आवश्यक है। भूमि अभिलेखों, सीमांकन रिपोर्टों और संबंधित नक्शों को डिजिटल माध्यम से सार्वजनिक एवं अद्यतन रखा जाना चाहिए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहनी चाहिए तथा भूमि स्वामित्व से संबंधित मामलों में सक्षम राजस्व प्राधिकारी के वैधानिक आदेशों के अनुरूप कार्यवाही होनी चाहिए। साथ ही, राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
मुख्य मांगें
- पूरे देश में GPS/GIS आधारित डिजिटल सीमांकन प्रणाली लागू की जाए।
- ड्रोन एवं आधुनिक सर्वे तकनीक से सीमांकन कर उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की जाए।
- भूमि अभिलेख, नक्शे और सीमांकन रिपोर्ट रियल-टाइम ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए।
- सीमांकन एवं नामांतरण के लिए समय-सीमा तय कर देरी पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- राजस्व विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
- राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतों के लिए स्वतंत्र एवं प्रभावी जांच व्यवस्था विकसित की जाए।
उदय चौधरी ने कहा कि “जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य, सम्मान और आजीविका का आधार है। तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही ही जमीनी विवादों का स्थायी समाधान है। न्याय में देरी भी अन्याय है।”
जारीकर्ता:
उदय चौधरी
सामाजिक कार्यकर्ता
दीपका, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़)
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

