कटघोरा/कोरबा। कोयला क्षेत्र की धूल और प्रदूषण के बीच यदि सड़क किनारे पथरीली जमीन पर आम, आंवला, अमरूद, कटहल और सीताफल जैसे फलदार पेड़ों की हरियाली नजर आए, तो सहज ही सवाल उठता है—आखिर यह संभव कैसे हुआ? इसका जवाब है मिडिल स्कूल बिंझरा विजयनगर, जिसने अपने नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से विद्यालय परिसर को एक जीवंत हरित परिसर में बदलने की मिसाल पेश की है।

कटघोरा विकासखंड का यह विद्यालय पिछले कई वर्षों से केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रचनात्मक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, कला-संस्कृति और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को शिक्षा का हिस्सा बनाकर अपनी अलग पहचान बना रहा है।
विद्यालय के प्रधानपाठक एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सर्वेश सोनी के निरंतर प्रयासों से यहां अधोसंरचना विकास के साथ विद्यार्थियों की सांस्कृतिक, साहित्यिक, हस्तकला, मूर्तिकला और नृत्य कला जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला है। स्थानीय संसाधनों से दोना-पत्तल निर्माण से लेकर फलोद्यान और किचन गार्डन तक, विद्यालय में बच्चों को सीखने के साथ-साथ करके देखने का अवसर मिलता है।

मंदिर से लेकर फलोद्यान तक, परिसर में दिखती है प्रकृति की पाठशालाविद्यालय परिसर में माता सरस्वती का सुंदर मंदिर है। इसके आसपास आम, आंवला, करौंदा, चीकू, नींबू, सीताफल, रामफल, अमरूद, कटहल, मुनगा, बेल और अनार सहित अनेक फलदार वृक्ष विकसित किए गए हैं।
वहीं गुलमोहर, गुड़हल और गुलाब जैसे फूलदार पौधे परिसर की सुंदरता बढ़ाते हैं। विभिन्न औषधीय एवं उपयोगी पौधों ने विद्यालय परिसर को एक तरह की जीवंत वनस्पति पाठशाला का रूप दे दिया है।
खास बात यह है कि यह हरियाली किसी बड़े उद्यान में नहीं, बल्कि कोयला क्षेत्र की धूल और प्रदूषण से प्रभावित सड़क के किनारे मौजूद पथरीली जमीन पर विकसित हुई है। यही कारण है कि विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही इसकी हरियाली लोगों को आकर्षित करती है।
पौधों से बच्चों का रिश्ता, अब पेड़ों को पहनाएंगे अपने हाथों की राखीविद्यालय के विद्यार्थी केवल पौधों की देखभाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपना साथी और परिवार का हिस्सा मानकर उनसे भावनात्मक जुड़ाव भी विकसित कर रहे हैं। इसी कड़ी में रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर विद्यार्थी अपने विद्यालय परिसर में स्वयं लगाए और संरक्षित किए गए पौधों को अपने हाथों से बनाई गई राखियां पहनाने की तैयारी में जुट गए हैं।
बच्चों द्वारा तैयार की जा रही ये राखियां केवल सजावटी सामग्री नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी हैं।स्वतंत्रता दिवस पर पौधों के नाम होगी एक और अनूठी पहलविद्यालय में हर वर्ष की तरह इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए पौधों के साथ रक्षाबंधन की गतिविधि को जोड़कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की तैयारी है। इसके माध्यम से बच्चों में यह भाव विकसित किया जा रहा है कि पौधे केवल लगाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बचाने और उनकी देखभाल करने के लिए भी जिम्मेदारी निभानी होती है।
किताबों से आगे बढ़कर जीवन से सीख रहे विद्यार्थीविजयनगर मिडिल स्कूल की गतिविधियां यह संदेश देती हैं कि शिक्षा केवल कक्षा की चारदीवारी और किताबों तक सीमित नहीं है। जब विद्यार्थी मिट्टी से जुड़ते हैं, पौधे लगाते हैं, कला सीखते हैं, स्थानीय संसाधनों से उपयोगी वस्तुएं बनाते हैं और प्रकृति की देखभाल करते हैं, तब शिक्षा उनके व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनती है।
विजयनगर मिडिल स्कूल इसी सोच के साथ नवाचार, प्रकृति और रचनात्मकता को जोड़कर एक ऐसी शैक्षणिक संस्कृति विकसित कर रहा है, जहां विद्यालय परिसर सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सीखने, सृजन करने और प्रकृति से जुड़ने की प्रयोगशाला बन गया है।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

