बिलासपुर, 01 जून 2026। बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। कोरबा जिले के हरदी बाजार निवासी 81 वर्षीय स्वर्गीय उदय नारायण जायसवाल की उपचार के दौरान हुई मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही, आवश्यक जानकारी छिपाने तथा पारदर्शिता नहीं बरतने के आरोप लगाए हैं।
इस संबंध में परिजनों ने प्रेसवार्ता आयोजित कर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है।मृतक के पुत्र राजेश कुमार जायसवाल ने बताया कि उनके पिता को 14 अप्रैल 2026 को केवल दाहिने पैर में दर्द की शिकायत के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को विश्वास था कि सामान्य उपचार के बाद मरीज स्वस्थ होकर घर लौटेंगे, किन्तु उपचार के दौरान उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और 27 अप्रैल 2026 को उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा उपचार के दौरान मरीज की वास्तविक स्थिति, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं एवं उपचार प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि कई बार पूछे जाने के बावजूद यह नहीं बताया गया कि मरीज की हालत क्यों बिगड़ रही है तथा कौन-कौन सी चिकित्सकीय परिस्थितियां उत्पन्न हुईं।
राजेश जायसवाल ने कहा कि आज तक परिवार को यह संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है कि केवल पैर दर्द की शिकायत लेकर भर्ती हुए मरीज की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचार से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं पर अस्पताल का रवैया पारदर्शी नहीं रहा।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मरीज को आईसीयू तथा बाद में वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन इसके पीछे के चिकित्सकीय कारणों की पूरी जानकारी परिवार को नहीं दी गई। उनका कहना है कि भर्ती से लेकर मृत्यु तक की सम्पूर्ण उपचार प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए तथा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस आधार पर चिकित्सा संबंधी निर्णय लिए गए।
परिजनों ने मांग की है कि मरीज की मेडिकल फाइल, जांच रिपोर्ट, डॉक्टरों की सलाह, उपचार संबंधी निर्णयों एवं अस्पताल में अपनाई गई प्रक्रियाओं की किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए।मामले को लेकर परिजनों द्वारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, संभागायुक्त, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं संबंधित थाना प्रभारी को लिखित शिकायत भी भेजी गई है।
शिकायत में उपचार के दौरान संभावित लापरवाही की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की गई है।परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने परिवार को न्याय दिलाना नहीं है, बल्कि भविष्य में किसी अन्य मरीज एवं उसके परिवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना भी है।
प्रेसवार्ता के दौरान परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि मरीजों एवं उनके परिजनों को उपचार संबंधी निर्णयों की पर्याप्त जानकारी दी जानी चाहिए तथा चिकित्सा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए।गौरतलब है कि वर्तमान में इस मामले में केवल परिजनों के आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।
अपोलो अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। अतः आरोपों की सत्यता एवं उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष सक्षम एवं निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।परिजनों की प्रमुख मांगें:• उपचार प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
मरीज की संपूर्ण मेडिकल फाइल एवं उपचार संबंधी अभिलेखों की जांच की जाए।• आईसीयू एवं वेंटिलेटर में रखने के कारणों का स्पष्ट खुलासा किया जाए।• यदि किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।• भविष्य में मरीजों के हित में चिकित्सा संस्थानों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

