जनता के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जो लोग “जय श्री राम” के नारों के साथ सत्ता तक पहुंचे, उन्हीं पर अब पद के दुरुपयोग और कथित रूप से मंदिर तोड़ने की नोटिस जारी कर लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे हैं।
आरोप है कि बिना जांच, बिना सीमांकन और बिना वैधानिक पुष्टि के लगभग 14 परिवारों को नगर पालिका परिषद दीपका के नगर अध्यक्ष राजेंद्र राजपूत की सहमति एवं अनुमति से लोगो के घर एवं मंदिर तोड़ने की नोटिस जारी की गई। जबकि संबंधित भूमि वास्तव में किस विभाग अथवा स्वामित्व के अंतर्गत आती है, यह स्वयं जांच का विषय बताया जा रहा है।
जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि उचित जांच प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई, तो फिर इतनी कठोर कार्रवाई किस आधार पर की गई ?
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद अविनाश सिंह राजपूत द्वारा की गई कथित झूठी शिकायत के आधार पर यह पूरा मामला आगे बढ़ाया गया और बाद में प्रशासनिक स्तर पर सहमति मिलने के बाद सीएमओ कार्यालय से आधिकारिक नोटिस जारी हुई, जिससे प्रभावित परिवार मानसिक तनाव और भय के माहौल में जीने को मजबूर हुए।

अब जब मामला सार्वजनिक हो चुका है, तब लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

जनता का कहना है कि लोकतंत्र में पद का उपयोग जनहित के लिए होना चाहिए, न कि भय और विवाद पैदा करने के लिए।
⚖️ मांग —पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।✍️ उदय चौधरीपत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.




