यही वह पत्र बताया जा रहा है, जिसके आधार पर वार्ड क्रमांक 11 के पार्षद अविनाश सिंह राजपूत द्वारा शिकायत की गई और बाद में लगभग 14 परिवारों को घर एवं मंदिर तोड़ने संबंधी नोटिस जारी की गई।
अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि —❓ बिना आधिकारिक जांच❓ बिना सीमांकन❓ बिना वैधानिक पुष्टिके आखिर किसी मकान या मंदिर को अवैध घोषित कर नोटिस कैसे जारी की गई?
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि इस कार्रवाई के पीछे निजी स्वार्थ, दबाव और कथित रूप से ब्लैकमेलिंग जैसी मानसिकता काम कर रही थी।साथ ही यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ स्थानों को खाली करवाकर व्यावसायिक उपयोग की मंशा से पूरा घटनाक्रम आगे बढ़ाया गया।
मामले में लोगों की नाराजगी इसलिए भी बढ़ी क्योंकि कथित रूप से एक पुराने मंदिर को भी नोटिस के दायरे में लिया गया।जनता सवाल उठा रही है कि यदि भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं थी, तो मंदिर सहित परिवारों को नोटिस किस आधार पर दी गई?
आरोप यह भी है कि केवल शिकायत के आधार पर बिना जांच कार्रवाई करना प्रशासनिक प्रक्रिया और जनहित दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।जब तक मामला सार्वजनिक नहीं हुआ था, तब तक प्रभावित परिवार भारी मानसिक दबाव में जी रहे थे।लोगों का कहना है कि उनकी जीवनभर की कमाई और आशियाना दांव पर लग गया था।
अब मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।⚖️ जनता की मांग —पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।✍️ उदय चौधरीपत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.




