दीपका, दिनांक —दीपका को उप तहसील से पूर्ण तहसील का दर्जा मिलना क्षेत्रवासियों के लिए गर्व और खुशी का विषय था। नए तहसील कार्यालय का लोकार्पण हुए लगभग एक वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक तहसील परिसर की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से स्थापित नहीं हो सकी हैं।
तहसील परिसर में मूलभूत सुविधाओं का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। शौचालयों में जल की व्यवस्था नहीं है, वहीं पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है। जिससे गर्मी के मौसम मे कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पार्किंग स्थल में केवल शेडिंग लगाकर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। पार्किंग क्षेत्र में मिट्टी डालकर महीनों से यूं ही छोड़ दिया गया है, जिससे न तो वाहन व्यवस्थित खड़े हो पा रहे हैं और न ही नागरिकों को इसका लाभ मिल पा रहा है।

परिसर में किए गए कांक्रीटिंग कार्य की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोगों एवं वकीलों का मानना है की कांक्रीटिंग कार्य में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है। जब वाहन तहसील परिसर में प्रवेश करते हैं, तो राखड़ जैसी धूल का गुबार कांक्रीटिंग से उड़ने लगता है। जिससे वकीलों के कार्यालयों में धूल भर जाती है और इससे वकीलों का व नागरिकों का कार्य प्रभावित होता है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित हो रही है।

तहसील परिसर तक पहुंचने के लिए सड़क निर्माण भी अधूरा है। निजी भूमि विवाद के चलते मुख्य सड़क से तहसील तक कंक्रीट सड़क नहीं बन पाई है। इसके अतिरिक्त, किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मार्ग में राखड़ डंप कर दिया गया है, जिससे आवागमन और भी कठिन हो गया है। सरकारी भवन बनने से पहले पहुंच मार्ग की व्यवस्था की जाती है। मगर यहाँ भवन बनने उपरांत पहुंच मार्ग अधर मे लटक गया है। बिच मे प्राइवेट भूमि आने से सड़क से तहसील का कनेक्शन टूटता नजर आ रहा है शायद इसी कारण सड़क से तहसील के बिच कांक्रीटिंग का कार्य पेंडिंग है।

सुरक्षा व्यवस्था भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। तहसील परिसर में बाउंड्री वॉल का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन मुख्य प्रवेश द्वार पर गेट नहीं लगाया गया है। पुराने गेट को बंद कर दिया गया है और नए प्रवेश मार्ग पर गेट की अनुपस्थिति के कारण असामाजिक तत्वों के प्रवेश की आशंका बनी रहती है। रात्रि के समय यहां शराबखोरी और अन्य अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ गया है, जिससे परिसर में स्थित मंदिर की पवित्रता भी प्रभावित हो सकती है।

साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यद्यपि सफाई कर्मी तहसील के अंदर कार्य करते हैं, लेकिन वकीलों के कार्यालयों और पूरे परिसर में नियमित एवं समुचित सफाई नहीं हो रही है।
इन सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारी हैं, जिनकी निगरानी में यह कार्य हुआ है, लेकिन आज तक अधूरा और निम्न स्तर का बना हुआ है।
मांग:
स्थानीय वकीलों एवं नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—
तहसील परिसर में सभी अधूरे कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए।
कंक्रीटिंग कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पार्किंग स्थल को पूर्ण रूप से विकसित किया जाए।
मुख्य प्रवेश द्वार पर गेट लगाकर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए।
सड़क निर्माण एवं पेय जल व शौचालय मे जल की व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए।
तहसील परिसर के साथ वकीलों के परिसर की भी नियमित एवं प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए।
यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो क्षेत्रवासी एवं वकील वर्ग आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

