मूलनिवासी संघ आगामी 25 दिसंबर 2025 को मनुस्मृति दहन दिवस के रूप में सेलिब्रेट करने जा रहा है। जैसा की सर्व विदित है की बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी नें 25 दिसंबर 1927 को मनुस्मृति को दहन करके भारतीय मूलनिवासीयों को शोषणकारी, असामाजिक, अमानवीय नियमो से आजादी दिलाई थी। और मानवतावादी, जन कल्याणकारी सामाजिक उत्थान व समानता वाले नियम क़ानून की रचना करके एक मिशाल क़ायम किए थे।

असत्य पर सत्य की जीत, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतिक स्वरुप प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मूलनिवासी संघ उत्सव के रूप में मनाता आया है। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मूलनिवासी संघ के बैनर तले मनुस्मृति दहन दिवस पुरे देश भर में मनाया जा रहा है। इसी तारतम्य में कोरबा जिले में भी मनुस्मृति दहन दिवस उत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जायेगा। जिसको लेकर प्रशासन को शांति व्यवस्था क़ायम रखने के लिए अग्रिम सुचना दे दी गई है।

जैसा की कोरबा जिले के मूलनिवासी खासकर भू विस्थापित तरह तरह के मनुस्मृति के अंश से प्रभावित हैं। जैसा की कोयलांचल नगरी होने की वज़ह से निरंतर खदान का विस्तार होते रहता है। जिस हेतु कोयला खदाने मूलनिवासीयों के जमीने अर्जन किया करती है। मगर जमीन अर्जन करने हेतु भारतीय सांविधान में ऑलरेडी कोल् बियरिंग एक्ट 1957 दिया गया है। जिसके तहत मूलनिवासी भू विस्थापितों को पुनर्वास रोजगार एवं मुआवजा दिया जाना चाहिए।

मगर बजाये कोल् बियरिंग एक्ट के कोयला कंपनी SECL प्रबंधन वर्षों से मूलनिवासीयों भू विस्थापितों की जमीने आर एन्ड आर पॉलिसी नामक मनुस्मृति के अंश की आड़ में अर्जन किया करता है।

आपको बतला दें की SECL द्वारा निर्मित आर एन्ड आर पॉलिसी को मानने हेतु मूलनिवासी भू विस्थापित बाध्य नहीं। मगर भोले भाले ग्रामीणों को आर एन्ड आर पॉलिसी को ही भारतीय संविधान के रूप में प्रस्तुत करके तरह तरह के शोषण कारी नियमो का हवाला देकर मूलनिवासी भू विस्थापितों का शोषण तकरीबन 40 वर्षो से निरंतर करता चला आ रहा है। अब ग्रामीणों को आर एन्ड आर पॉलिसी एवं भारतीय संविधान में भेद ना कर पाने का फायदा SECL प्रबंधन उठाता है।

और आर एन्ड आर पॉलिसी नामक मनुस्मृति के अंश के आड़ में मूलनिवासी भू विस्थापितों के रोजगार पुनर्वास एवं मुआवजा से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का लम्बे समय से हनन करता चला आ रहा है। हमारे पूर्वज समय समय पर समाज में व्याप्त कुरीतियों का विरोध करके उससे समाज को मुक्त करते रहे हैं।

आज हम मूलनिवासियों का यह दायित्व बनता है की हम की वर्तमान सामाजिक परिवेश में ऐसे कौन कौन से नियम हैं जो मनुस्मृति का अंश हैं जो समाज में असमानता फैलाते हैं। उन्हें चिन्हाँकित कर उसका विरोध करके समाज को उन बेड़ियों से मुक्त कर स्वतंत्र जीवन जीने में मदद करें।

मूलनिवासी संघ गैर राजनैतिक सामाजिक रजिस्टर्ड संस्था है। जिसका मूल उद्देश्य ST/SC/OBC और कन्वर्टेड मुस्लिम एवं क्रिस्चियन के हक अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करना है। और उनके मौलिक अधिकारों एवं संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की दिशा में काम करना है। जिसके लिए समाज में व्याप्त दमनकारी, ब्राह्मणवादी, शोषणकारी, असामाजिक, असंवैधानिक विचारों को पहचानकर उन बेड़ियों से समाज को मुक्त करना है।

मूलनिवासी संघ की तरह भारत देश में अनेकों ऐसे संगठन हैं जो अलग अलग संस्था के माध्यम से ब्राह्मणवाद से लड़ने का और संविधान को समाज में पूर्ण रूप से बहाल किए जाने हेतु संघर्षरत है। मूलनिवासी संघ की ओर से उन तमाम संगठनों को मनुस्मृति दहन दिवस में सादर आमंत्रित किया गया है।

मूलनिवासी संघ कोरबा जिलाध्यक्ष उदय चौधरी नें मूलनिवासीयों के हक अधिकार को लेकर संघर्ष करने वाले तमाम संगठनों को मनुस्मृति दहन दिवस के सुवसर पर उत्सव के रूप में मनाये जाने हेतु सादर आमंत्रित किए हैं। और मूलनिवासीयों के कल्याण अर्थ सामाजिक रूप से सक्रिय तमाम संगठनों को एकजुट होकर ब्राह्मणवादी शोषणकारी विचारों से समाज को मुक्त करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने के लिए अपील किए हैं।

मूलनिवासी संघ कोरबा जिलाध्यक्ष उदय चौधरी नें मूलनिवासीयों के हक अधिकार को लेकर संघर्ष करने वाले तमाम संगठनों को मनुस्मृति दहन दिवस के सुवसर पर उत्सव के रूप में मनाये जाने हेतु सादर आमंत्रित किए हैं। और मूलनिवासीयों के कल्याण अर्थ सामाजिक रूप से सक्रिय तमाम संगठनों को एकजुट होकर ब्राह्मणवादी शोषणकारी विचारों से समाज को मुक्त करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने के लिए अपील किए हैं।

आगामी 25 दिसंबर 2025 को दीपका के काला मैदान मे समय दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक मनुस्मृति दहन दिवस उत्सव के रूप में मनाया जायेगा जिसमे स्थानीय तमाम मूलनिवासीयों को अपने श्रेष्ठ विचार रखने के लिए आमंत्रित किया जाता है। साथ ही मूलनिवासीयों के हित के लिए संघर्षरत तमाम सामाजिक संगठनों को भी मनुस्मृति दहन दिवस के अवसर पर उत्सव मनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

