चिरचारी जिला राजनांदगांव निवासी मनीष जैन द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर मूलनिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में अभद्र टिप्पणी करने के खिलाफ मूलनिवासी संघ नें मोर्चा खोला है। जिसे लेकर हर जिले में उक्त व्यक्ति के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की मांग उठी है। आपको बतला दें की मनीष जैन द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर आरक्षण को लेकर इतनी गन्दी टिप्पणी की गई है की इससे मूलनिवासी समाज में रोष व्याप्त है।जैसा की सर्व विदित है की आज की तारीख में आरक्षण केवल ST/SC/OBC तक ही सिमित नहीं रहा। बल्कि आज तो EWS आरक्षण भी लागु हो चूका है। मतलब स्वर्ण वर्ग के लिए भी आज की तारीख में आरक्षण लागु हो चूका है। और आरक्षण कोई खैरात नहीं बल्कि सामाजिक संतुलन का एक नायाब तरीका है। जैसा की सर्व विदित है की मूलनिवासी समाज पर अतीत में कितने अत्याचार हुवे। उनके हक अधिकार छीनकर उनके विकास को रोका गया। जिसके संतुलन हेतु आरक्षण लागु हुआ था।
ताकि जिनसे अवसर छीनकर जिनका विकास रोका गया उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़कर सामाजिक समरसता स्थापित किया जा सकें सामाजिक संतुलन बनाया जा सके। मगर आज की युवा पीढ़ी में से कई लोग जो बातों की गहराई नहीं जानते वह बस वर्तमान को देखते हैं जिन्हे लगता है की उनके साथ अन्याय हो रहा है। जब की यह सामाजिक संतुलन लाने की संविधान में शामिल की गई युक्ति है।
आरक्षण का विरोध करना सीधे सीधे संविधान का विरोध करने की श्रेणी में आता है। और संविधान का विरोध देश द्रोहिता की श्रेणी में आता है। मूलनिवासी संघ नें कहा की संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में अभद्र टिप्पणी कर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने, सामाजिक शांति भंग करने का प्रयास किया गया है। साथ ही साथ संविधान नें लोगों को जो आरक्षण जैसे संवैधानिक अधिकार दे रखे हैं। उस विषय पर अमर्यादित अभद्र बातें कहना संविधान के प्रति आस्था रखने वालों की आस्था को ठेंस पहुंचाती है। भारत देश संविधान से चलता है।
संविधान के खिलाफ अमर्यादित अभद्र टिप्पणी करके उक्त व्यक्ति द्वारा देशद्रोहिता वाला कृत्य किया गया है। जिसे मूलनिवासी समाज बिल्कुल भी बर्दास्त नहीं करेगा। हम मूलनिवासी समाज की ओर से ऐसे कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं। साथ ही विरोध दर्ज करते हैं। इसको लेकर मनीष जैन को माफ़ी मांगनी होगी। इन्होने जो भारतीय संविधान के ऊपर ऊँगली उठाने का दुस्साहस किया गया है। इसके लिए इन्हे शख्त से शख्त सजा मिलनी चाहिए। जो अन्य लोगों के लिए भी सबक का एक विषय बनें। अन्यथा ऐसे असंवैधानिक बातें सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का काम करती हैं। मूलनिवासियों को संविधान में मिला आरक्षण कोई भीख नहीं बल्कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है। जो समाज में व्याप्त असमानता को समाप्त करने के लिए लागु किया गया।
आज मूलनिवासी समाज पढ़ लिखकर आगे बढ़ने लगा तो यह बात इनके व इन जैसे ओंझी मानसिकता के लोगों की आँखों में चुभने लगा है। इसलिए आज भी ओंझी मानसिकता के लोग आरक्षण के खिलाफ षड्यंत्र रचते रहते हैं। ताकि जिस तरह अतीत में मूलनिवासी समाज से अवसर छीनकर उनका विकास रोका गया था वैसा पुनः किया जा सके। ज्ञात हो की केंद्र सरकार द्वारा सभी वर्ग (ST/SC/OBC एवं EWS स्वर्ण समुदाय) को आरक्षण का लाभ दिया गया है।आरक्षण के बारे में गलत टिप्पणी करना मतलब असमानता को बढ़ावा देनें वाले विचारों का समर्थन करना। मनीष जैन द्वारा किए गए टिप्पणी से ही महसूस हो रहा है की यह कितनी ओंझी मानसिकता के व्यक्ति हैं। अगर किसी को किसी भी विषय पर कोई विचार प्रगट करने हैं तो बातों को सभ्य तरिके से समाज के बिच रखनें को हर कोई स्वतंत्र हैं। भारतीय संविधान भारत के प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की आजादी देता है। मगर मन में व्याप्त हिंसक वृत्ति, असमानता के भाव, कटुता को असभ्य व अमर्यादित शब्दों में सार्वजनिक रूप से कहना इससे सामाजिक शांति भंग होती हैं। जो की क्रिमिनल एक्ट की श्रेणी में आता है। जिसकी आजादी किसी को नहीं, इन्होने जो कृत्य किया उसके लिए इन पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। जिससे की ऐसे मानसिकता से इन्फेक्टेड अन्य कोई इस तरह के अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने से बचे।साथ ही साथ मूलनिवासी संघ इस विरोध के माध्यम से समाज को भी यह सन्देश देना चाहते हैं की आरक्षण मूलनिवासियों का संवैधानिक अधिकार है। इसे खैरात समझने की जुर्रत ना करें। आरक्षण देश के नागरिकों का संवैधानिक अधिकार हैं। आरक्षण के विरोध में अमर्यादित टिप्पणी करना देशद्रोहीता की श्रेणी में आता है ऐसा करना आपको सलाखों के पीछे ढकेल सकता है। हम सर्व समाज से यह अपील करते हैं की किसी के उकसावे में ना आएं, किसी का मोहरा ना बने। कई लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए भी आरक्षण के विरोध में टिप्पणी करने को किसी को उकसाते रहते हैं। किसी के उकसावे में ना आएं और उकसाने वाले भी चेत जाएं।मूलनिवासी संघ नें कहा की हम संविधान के नक़्शे कदम पर चलने वाले लोग हैं। और जो संविधान का नहीं वह किसी काम का नहीं, जो संविधान विरोधी बातें करता है। ऐसे व्यक्ति पर तो देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करना चाहिए। संविधान के नियमावली से ही भारत देश चल रहा है। मतलब संविधान भारत की आत्मा है।अब संविधान में लोगों को जो आरक्षण दिया गया है वह समाज में समानता लाने के उद्देश्य से लागु किया गया है। और मनीष जैन व इन जैसी ओंझी मानसिकता के लोगों के कारण ही समाज में आज तक असमानता का भाव कहीं ना कहीं व्याप्त है। जो भीतर से कुछ और मगर बाहर से कुछ और दर्शाते हैं। भारतीय संविधान की कड़ी आरक्षण को देशद्रोहिता बतलाने वाले मनीष जैन पर सांप्रदायिक उन्माद भड़काने का साथ ही संविधान का विरोध कर देश विरोधी बात करने पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। आगे मूलनिवासी संघ नें मनीष जैन पर त्वरित कार्यवाही की मांग की है।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

