छत्तीसगढ़ – कोरबा – गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) ईश्वर अर्मेक्शन जी के नेतृत्व में एवं जिला सरपंच संघ के आह्वान पर आज सिरकी मोड़, कोरबा में आयोजित महापंचायत जनआंदोलन में जिले के विभिन्न ग्रामों से हजारों की संख्या में ग्रामीण, आदिवासी, किसान, महिलाएँ एवं युवा शामिल हुए।

यह महापंचायत वर्षों से लंबित जनसमस्याओं, प्रशासनिक उदासीनता, कॉरपोरेट शोषण तथा आदिवासी अधिकारों के निरंतर हनन के विरुद्ध एक सशक्त जनघोषणा के रूप में सामने आई।
महापंचायत में जिला प्रशासन एवं एसईसीएल प्रबंधन की उपस्थिति में सभा को संबोधित करते हुए।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री ईश्वर अर्मेक्शन ने कहा—“आज हम यहाँ किसी मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपने हक, सम्मान और इंसाफ के लिए एकत्र हुए हैं। कोरबा जिला, जिसके कोयले से पूरे देश को रोशनी मिलती है, वही कोरबा आज धूल, बीमारी, दुर्घटनाओं और मौत के साये में जीने को मजबूर है।”

उन्होंने प्रशासन से प्रश्न किया कि कोयला देश के लिए, मुनाफा कंपनियों के लिए और प्रदूषण, बीमारी व मौत कोरबा की जनता के हिस्से क्यों?दीपका, गेवरा एवं कुसमुंडा क्षेत्रों में लगातार लगने वाले जाम, सड़क दुर्घटनाएँ तथा स्कूली बच्चों एवं मरीजों का घंटों फँसना प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण बताया गया।
धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक पहचान पर हमला
सभा में विशेष रूप से झाबर क्षेत्र में हो रहे अवैध अतिक्रमण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता एवं मिलीभगत को दर्शाता है।
यह केवल भूमि का प्रश्न नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और अस्तित्व पर सीधा हमला है।
सभा में आरोप लगाया गया कि ठेका कंपनियाँ स्थानीय युवाओं की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को रोजगार दे रही हैं। आंदोलनकारियों ने कम से कम 80 प्रतिशत स्थानीय रोजगार,मल्टीस्पेशलिस्ट अस्पताल एवं माइनिंग कॉलेज की स्थापना को अपना संवैधानिक अधिकार बताते हुए मांग दोहराई।
कोरबा जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष श्री छत्रपाल सिंह राज ने कहा कि कोरबा जिला संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहाँ पेसा कानून लागू है। इसके बावजूद निर्वाचित आदिवासी सरपंचों पर बिना जाँच मुकदमे दर्ज करना, दमनात्मक कार्रवाई करना एवं प्रशासनिक दबाव बनाना संविधान का खुला उल्लंघन है।
सभा में स्पष्ट शब्दों में कहा गया—
“जल हमारा है, जंगल हमारा है, जमीन हमारी है—तो फिर निर्णय कंपनियाँ और दिल्ली क्यों कर रही हैं?”

जिला पंचायत सदस्य श्री विद्वान सिंह मरकाम ने ग्रामसभा की सहमति के बिना जंगल कटाई, भूमि अधिग्रहण, जल स्रोतों पर नियंत्रण तथा पर्यावरणीय क्षति को अवैध बताते हुए चेतावनी दी कि यदि आदिवासी अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो यह आंदोलन हर गाँव, हर गली और पूरे जिले में फैलाया जाएगा।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, किंतु कमजोर नहीं—
“हम अधिकार माँगते हैं, भीख नहीं। हम चुप नहीं बैठेंगे, संघर्ष करेंगे।”*गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री मोहन सिंह राज ने कहा—*“हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास जो आदिवासियों को उनकी जमीन, संस्कृति और भविष्य से बेदखल कर दे, उसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार ग्रामसभा का है, न कि कंपनियों या दिल्ली की फाइलों का।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महापंचायत में उठाई गई मांगों पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर ठोस, लिखित एवं धरातलीय कार्यवाही नहीं की गई, तो यह आंदोलन जिला-स्तर से राज्य-स्तर तक और अधिक व्यापक रूप लेगा।
*गोंडवाना महासभा के सभापति श्री निर्मल सिंह मरकाम* ने स्पष्ट किया कि एसईसीएल दीपका क्षेत्र में वर्ष 1988 में संपन्न एग्रीमेंट आज भी पूर्णतः प्रभावशील, वैध एवं प्रवर्तनीय है तथा उसके संपादन के समय वे स्वयं प्रत्यक्ष साक्षी रहे हैं।
उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन द्वारा एग्रीमेंट के प्रावधानों के समुचित एवं पूर्ण पालन न किए जाने पर कड़ा खेद व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएँ, स्थानीय रोजगार, पुनर्वास-पुनर्स्थापन, अधोसंरचना एवं सामाजिक दायित्व जैसे प्रावधानों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा—
“जब प्रबंधन स्वयं 1988 के एग्रीमेंट के आधार पर कार्य कर रहा है, तब उसके शेष प्रावधानों से पीछे हटना न केवल अनुचित है, बल्कि समझौते की मूल भावना के साथ विश्वासघात और संविदात्मक दायित्वों का गंभीर उल्लंघन है।”महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सभी मांगों पर समयबद्ध कार्यवाही नहीं हुई, तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं जिला सरपंच संघ के संयुक्त नेतृत्व में आंदोलन को और अधिक तीव्र एवं व्यापक किया जाएगा।
आगामी चरण में जिला-स्तरीय घेराव, कोयला परिवहन मार्गों पर लोकतांत्रिक विरोध तथा राज्य-स्तरीय आंदोलन की रणनीति अपनाई जाएगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन एवं संबंधित प्रबंधन की होगी।उपस्थितिमहापंचायत के दौरान जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी), नायब तहसीलदार हरदी बाजार श्री अभिजीत सिंह, नायब तहसीलदार दीपका श्री अमित केरकेट्टा तथा थाना प्रभारी दीपका श्री प्रेम चंद साहू उपस्थित रहे।
एसईसीएल प्रबंधन की ओर से एचआर प्रतिनिधि श्री जे.के. दुबे, एचओडी (सिविल) एवं तकनीकी टीम सम्मिलित हुई।
जनप्रतिनिधियों में जनपद सदस्य श्री बसंत कंवर एवं श्री विजय प्रभात कंवर, तथा बतरा सरपंच संघ की उपाध्यक्ष श्रीमती रामायण देवी प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। इसके अतिरिक्त तिवरता, सिरकी, झाबर, रतिजा, नौंबिर्रा, चैनपुर, उड़ता, रेंकी, बसीबर, सराईपाली, दमिया, डोंगनाला, धौराभांटा, अंडी कछार, बम्हनी कोना, मुड़ापार, माखनपुर एवं डूमरकछार सहित अनेक ग्राम पंचायतों के निर्वाचित सरपंच, जनप्रतिनिधि तथा पार्टी के पदाधिकारी एवं हजारों कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

