ज्ञात हो की बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी नें 25 दिसंबर 1927 को मनुस्मृति का दहन कर अमानवीय बेड़ियों से समाज को मुक्त किए थे। जिसकी यादगार में 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष मूलनिवासी समाज मनुस्मृति दहन दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ उत्सव के रूप में मनाता है। मूलनिवासी संघ जो की ST/SC/OBC के हक अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्षरत गैर राजनैतिक सामाजिक रजिस्टर्ड संगठन है।

मूलनिवासी संघ के बैनर तले असत्य पर सत्य की जीत मनुस्मृति पर भारतीय संविधान की जीत के प्रतिक स्वरुप सम्पूर्ण भारत वर्ष में 25 दिसंबर को मनुस्मृति दहन महोत्सव सेलिब्रेट किया जाता है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मूलनिवासी संघ से जुड़े सदस्यों नें देश के अलग अलग कोनो में मनुस्मृति दहन दिवस सेलिब्रेट किया। इसी तारतम्य में कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र अंतर्गत काला मैदान में भी मनुस्मृति दहन दिवस उत्सव के रूप में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के बारे में अग्रिम सुचना कोरबा जिलाधीश महोदय, पुलिस अधीक्षक कोरबा, दीपका तहसीलदार एवं थाना प्रभारी दीपका, नगर पालिका दीपका को दी जा चुकी थी।


मगर अचानक कार्यक्रम आरम्भ होने के ठीक पहले दीपका थाना के पुलिस कर्मी दल बल के साथ आकर कार्यक्रम का विरोध करने लगे। और कार्यक्रम करने से मना करने लगे। जिसमे विशेषकर दीपका थाने के ASI जितेश सिंह राजपूत नामक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आये। जो कार्यक्रम ना होने देने की लिए पूरा जोर लगा रहे थे। पुलिस प्रशासन द्वारा मूलनिवासी संघ के सदस्यों से नगर पालिका दीपका का परमिशन दिखाने को कहा गया। यहाँ तक की नगर पालिका दीपका से एक कर्मचारी को पहले ही कार्यक्रम स्थल पर गवाही देने के लिए रखा गया था। माना कार्यक्रम को नाकाम करने की पूरी साजिश रची गई थी।

जिनसे पूछवाया गया की क्या इन्होने नगर पालिका दीपका से कार्यक्रम के लिए परमिशन लिया है। उनका जवाब था की नहीं परमिशन तो नहीं लिया। सवाल यह उठता है की नगर पालिका को जब कार्यक्रम की लिखित सुचना दी गई थी तब नगर पालिका उसमे रिसीविंग दिए जिसकी कॉपी पब्लिश की गई है। जिसमे आप नगर पालिका दीपका के सील व हस्ताक्षर देख सकते हैं। कॉपी में आप देख सकते हैं की नगर पालिका दीपका में कार्यक्रम की सुचना दी गई तब नगर पालिका दीपका की ओर से किसी तरह का कोई मौखिक या लिखित या टेलीफॉनिक विरोध नहीं किया। ना ही परमिशन लेने की व जगह बुक करने की प्रक्रिया के बारे में बतलाये।

LIB कोरबा से भी कार्यक्रम को सुरक्षित व शांति तरिके से किए जाने में सहयोग प्रदान करने को लेकर कॉल आया था। वह तो को-ऑपरेट करने का आश्वासन दिए थे। मगर स्पेशली दीपका थाने में पदस्थ ASI जितेश सिंह राजपूत को कार्यक्रम से बड़ी तकलीफ थी और वह वर्दी की आड़ में अपनी खुन्नस निकालने के लिए कार्यक्रम में बाधक बन रहे थे। यहाँ तक की ASI जितेश सिंह राजपूत एवं भाजपा कार्यकर्त्ता अभिषेक सिंह राजपूत मिलकर ही षड़यंत्र रचे थे कार्यक्रम को ध्वस्त करने के लिए। और विरोध करने के लिए भाजपा, बजरंग दल व आरएसएस के कुछ सदस्यों को भी कार्यक्रम स्थल पर यही दोनों बुलाये थे विरोध करने के लिए । पुरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन भाजपा आरएसएस एवं बजरंग दल के साथ ही बैठे रही। उनकी जो वास्तविक ड्यूटी थी।


आंदोलन कारीयों को संरक्षण प्रदान करने की वह छोड़कर पुलिस प्रशासन BJP, बजरंग दल व आरएसएस के लोगों को गुंडागर्दी करने के लिए संरक्षण देकर रखें हुवे थे। की मौका पाकर कार्यक्रम को कुचला जा सके। कार्यक्रम के दौरान दीपका पुलिस की भूमिका जन विरोधी और संदिग्ध नजर आयी। अंततः मनुस्मृति दहन ना करने में सहमति बनी, और साथ ही शांति व्यवस्था के साथ कार्यक्रम को संचालित करने पर पुलिस प्रशासन हामी भरे अन्यथा वह तो कार्यक्रम ही नहीं होने देंगे बोल रहे थे।

आपको बतला दें की ACB इंडिया से पैसे खाकर नगर पालिका परिषद दीपका खुलेआम आम सड़को पर भारी वाहन परिवहन किए जाने हेतु मौन सहमति देता है। और यह आज से नहीं बल्कि 20 वर्षों से चला आ रहा है। मगर आज जब मूलनिवासी समाज असत्य पर सत्य के जीत के प्रतिक स्वरुप मनुस्मृति दहन दिवस मनाने एकजुट हुआ तब मूलनिवासी समाज को नगर पालिका दीपका यह कह रहा है की क्या आपने हमसे परमिशन लिया। क्या आपने हमें शुल्क अदा कर बुक किया।

सवाल यह उठता है की अगर दीपका नगर पालिका को कार्यक्रम से किसी तरह की कोई आपत्ति थी तो जब उन्हें लिखित सुचना दी गई थी तब वह आपत्ति क्यों नहीं किए। तब वह क्यों नहीं बताये की कुछ पैसे देकर टोकन वगैरह कटवाना पड़ेगा। कुछ नहीं यह वार्ड क्रमांक 11 के वार्ड पार्षद लड्डू सिंह एवं अभिषेक सिंह द्वारा फैलाया गया षड़यंत्र था। जिन्हे कार्यक्रम से सबसे ज्यादा तकलीफ थी जिन्होंने दीपका थाने में पदस्थ ASI जितेश सिंह राजपूत का शहारा लिया विरोध करने के लिए। बस यही बात तो मूलनिवासीयों के लिए तकलीफ देह है की उसी मैदान में जब रावण जलाया जाता है तब किसी तरह की कोई रोक टोक नहीं होती।

मगर जब उसी मैदान में सचमुच का रावण राज्य फैलाने वाले SECL की आर एन्ड आर पॉलिसी जलाकर भ्रष्टाचार का वंश खत्म करने की पहल की जा रही है। तो मनुवादियों का विरोध होना यह दर्शाता है की शोषणकारी नियमो को इन जैसे लोग समाज में लागु रहने देना चाहते हैं। जिसकी आड़ में मूलनिवासी समाज का शोषण होता रहे। अब सवाल यह उठता है की आखिर ASI जितेश सिंह राजपूत इतना खुन्नस क्यों खाये हुवे हैं तो उसका जवाब आपको इस पत्र में मिल जायेगा। आप देख सकते हैं की आई.जी. को दिए पत्र में साफ साफ जिक्र किया गया है की SECL की ठेका कंपनी कलिंगा दीपका थाने में पदस्थ ASI जितेश सिंह राजपूत को अपने हांथो की कठपुतली बना रखें हैं।


जो वर्दी की आड़ में ठेका कंपनियों की दलाली किया करते हैं। जिसकी लिखित शिकायत पुलिस महानिरीक्षक से 2 महीने पूर्व भी की गई थी और अब पुनः किया गया है। बस यही वज़ह है की कार्यक्रम से सबसे ज्यादा तकलीफ जितेश सिंह राजपूत ए.एस आई. दीपका को हो रही थी। क्योंकि उनके आका SECL की आर एन्ड आर पॉलिसी की आड़ में ही मूलनिवासीयों का शोषण किया करते हैं। अगर शोषण के कारण को ही भष्म कर दिया गया तो समस्या का परमानेंट इलाज हो जायेगा। विरोध मनुस्मृति दहन का नहीं विरोध आधुनिक मनुस्मृति (SECL की आर एंड आर पॉलिसी ) दहन का था। जिसके लिए जितेश सिंह राजपूत, अभिषेक सिंह राजपूत सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आये।

बहर हाल मुद्दई लाख बूरा चाहे तो क्या होता है। वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है। पुलिस बल नें पूरी ऊर्जा लगा दी जिससे की एस.ई.सी.एल. की आर.एन्ड.आर पॉलिसी का दहन ना कर सकें। मगर इस आधुनिक मनुस्मृति को मूलनिवासी समाज अब शोषण क्व कारण को पहचान चूका है। और यह भी जान चूका है की यह पॉलिसी भारतीय संविधान का कोई अंग नहीं बल्कि SECL द्वारा निर्मित खुद के लाभ व मूलनिवासीयों को नुकसान पहुँचानें वाली शोषण कारी अमानवीय असामाजिक असंवैधानिक नियमावली है।

जिसकी आड़ में आज तक SECL मूलनिवासीयों का शोषण करता आया है। मूलनिवासी समाज यह भी जान चूका है। की SECL की आर.एन्ड.आर. पॉलिसी को मानने हेतु मूलनिवासी समाज बाध्य नहीं। ना ही इस पॉलिसी को मूलनिवासी समाज पर थोपा जा सकता है।

अब तक अज्ञानता में लोग इसे ढ़ोते आये और संविधान का हिस्सा समझकर मानते आये पालन करते आये। मगर अब भारतीय संविधान के कोल् बियरिंग एक्ट 1957 और SECL की आर.एन्ड.आर. पॉलिसी में भेद मूलनिवासी समाज जान चूका है।

सबसे आश्चर्य जनक बात यह रही की संगठन द्वारा प्रशासन को दिए गए सुचना में स्पष्ट शब्दों में उल्लेख था की SECL दीपका प्रबंधन एवं तहसीलदार महोदय को ज्ञापन रिसीव करने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना है। मगर चुंकि इनकी मंसा संवैधानिक अधिकारों का हनन कर कार्यक्रम को ध्वस्त करने की थी इसलिए कार्यक्रम स्थल पर कोई भी प्रशासनिक अधिकारी ज्ञापन रिसीव करने नहीं पहुंचा।

जब की जितेश सिंह राजपूत नामक ASI खुद कह रहे थे की उन्होंने लेटर का एक एक शब्द बहुत गंभीरता के साथ पढ़े थे तो क्या उन्हें लेटर में यह शब्द नजर नहीं आया की कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारीयों को ज्ञापन की कॉपी रिसीव करने पहुंचना है। नजर आएगा भी कैसे विरोधाभास के मूड में लेटर में बस यह ढूंढ़ रहे थे की ऐसी कौन सी कमी पकडूँ जिसके आधार पर कार्यक्रम को ही ध्वस्त किया जा सकें। अगर कलिंगा कंपनी की दलाली छोड़कर पुलिस का कर्तव्य निभाने पर ध्यान होता तो साफ साफ नजर आता की पत्र में ज्ञापन रिसीव करने के लिए प्रशासनिक अधिकारीयों को कार्यक्रम स्थल में पहुंचाना है।

कार्यक्रम में ज्यादातर मूलनिवासीयों भू-विस्थापितों की भीड़ गदगदाकर भरी हुई थी। उक्त कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी योगेश साहू जी के अलावा बसंत डिक्सेना सर, तारेश सर, कुमालता साहू मैडम, तेरस राम जी एवं कोरबा जिलाध्यक्ष उदय चौधरी, कटघोरा ब्लॉक अध्यक्ष राजेश जायसवाल भी उपस्थित थे। इन सबकी उपस्थिति में मनुस्मृति दहन महोत्सव कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम के साथ सेलिब्रेट किया गया। जय भी जय मूलनिवासी जय संविधान
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

