दीपका, कटघोरा विकासखंड: बेलटिकरी ग्राम पंचायत में तकरीबन छह महीने पहले शुरू किया गया नाली निर्माण कार्य अब तक अधूरा पड़ा हुआ है, जिस वज़ह से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधूरी नाली के कारण गांव में आवागमन बाधित हो रहा है, खासकर पास स्थित विद्यालय के छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को रोजाना कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है।

बरसात और जलभराव के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। पानी जमा होने से रास्ते कीचड़युक्त हो जाते हैं, जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत सचिव से शिकायत की गई, लेकिन समाधान के बजाय ग्रामीणों को उनके द्वारा अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ा। उपसरपंच, पंचगण और ग्रामवासियों ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को लिखित और मौखिक शिकायत भी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
नाली के जाम रहने से आसपास दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया व अन्य बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार राहगीरों के वाहन नाली में फंस चुके हैं। हाल ही में एक कार भी नाली में फंस गई, जिसे काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह द्वारा भी जनपद सीईओ से चर्चा की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है, जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नाली निर्माण कार्य पूरा कराया जाए और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
वैसे बेलटिकरी बसाहट SECL द्वारा बसाया गया विस्थापित ग्राम है जिसकी देख रेख की जिम्मेदारी SECL प्रबंधन को बनती है। मगर देखने में यही आता है की SECL जिन जिन ग्राम को विस्थापित कर पूनर्वाश बसाहट दिया उन ग्रामो को बसाने उपरांत प्रबंधन द्वारा किसी तरह का कोई देख रेख मरम्मत का कार्य नहीं किया जाता, सड़को की हालत भी वैसे ही है तो वहीं नालियों की हालत भी जर्जर हो चुकी, अब कोई जर्जर नाली को बनाने की जिम्मेदारी उठाया भी तो बिच धार में छोड़कर ना जाने कहां चले गए।
इस तरह से अधूरा कार्य करना यह ग्रामीणों के साथ छल है। और जिम्मेदारी पूरी ना निभाना इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की जिम्मेदार लोगों का जनहित से कोई सरोकार नहीं रहा। अगर जनहित से सरोकार होता तो आज परिस्थितियां इतनी बदहाल ना होती। इतने गुहार लगाने के बाद भी हालात ज्यों के त्यों हैं उनके कानो में जूँ तक नहीं रेंज रही। किसी अनहोनी के इंतज़ार में बैठे सुस्त लोग जब सचमुच किसी प्रकार की अनहोनी हो जाती है तब इनकी नींद खुलती है और तब तक देर हो चुकी होती है। इस समस्या की वज़ह से ग्रामीणों में काफ़ी आक्रोश व्याप्त है।
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

