कटघोरा/कोरबा, 10 अगस्त 2026।कटघोरा न्यायालय में विचाराधीन परिवाद प्रकरण में आरोपी उदय चौधरी ने माननीय न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी के समक्ष स्वयं Party-in-Person के रूप में अपना विस्तृत लिखित जवाब एवं बचाव-पत्र प्रस्तुत किया है। चौधरी ने परिवादी अभिषेक सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का बिंदुवार खंडन करते हुए कथित सोशल मीडिया पोस्ट, मोबाइल मैसेज एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के मूल स्रोत और प्रमाणिकता की जांच किए जाने की मांग की है।
“आरोप और प्रमाण दो अलग-अलग बातें”
उदय चौधरी ने अपने जवाब में कहा है कि केवल आरोप लगाए जाने मात्र से किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता। उनके अनुसार परिवाद में लगाए गए प्रत्येक आरोप के समर्थन में आवश्यक तथ्य, दस्तावेज और विश्वसनीय साक्ष्य का परीक्षण किया जाना आवश्यक है।चौधरी ने कथित रूप से उनके द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, मोबाइल मैसेज अथवा अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर सामग्री प्रकाशित करने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
मूल पोस्ट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पर उठाए सवालअपने बचाव-पत्र में चौधरी ने कथित सोशल मीडिया सामग्री के संबंध में कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि यदि किसी पोस्ट या संदेश को उनके द्वारा प्रकाशित बताया जा रहा है तो उसके संबंध में—मूल पोस्ट/कंटेंट क्या है?प्रकाशन की तारीख एवं समय क्या है?किस अकाउंट से पोस्ट की गई?संबंधित अकाउंट किसके नियंत्रण में था?
मूल URL अथवा लिंक क्या है?कथित पोस्ट का मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कहां है?पोस्ट आरोपी से संबंधित होने का तकनीकी प्रमाण क्या है?कथित सामग्री किन व्यक्तियों तक पहुंची?उससे परिवादी की प्रतिष्ठा को वास्तविक रूप से किस प्रकार क्षति पहुंची?इन बिंदुओं का विधि अनुसार परीक्षण किया जाए।“केवल स्क्रीनशॉट से प्रकाशक होना स्वतः सिद्ध नहीं”उदय चौधरी ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा है कि किसी स्क्रीनशॉट, प्रिंटआउट अथवा सोशल मीडिया प्रोफाइल पर दिखाई देने वाले नाम या फोटो के आधार पर ही किसी सामग्री का प्रकाशक आरोपी को मान लेना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कथित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की उत्पत्ति, स्रोत, अखंडता, संबंधित अकाउंट/डिवाइस और आरोपी से उसके संबंध को विधि के अनुसार प्रमाणित किए जाने की मांग की है।‘जलन’ और ‘बदनाम करने की मंशा’ के आरोप का खंडनपरिवादी द्वारा उदय चौधरी पर कथित रूप से जलन रखने तथा प्रतिष्ठा धूमिल करने की मंशा से कार्य करने के आरोप का भी चौधरी ने स्पष्ट खंडन किया है।उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की कथित मानसिक मंशा के संबंध में निष्कर्ष केवल अनुमान के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके समर्थन में ठोस एवं विश्वसनीय परिस्थितिजन्य साक्ष्य आवश्यक होंगे।
पुलिस शिकायत और अधिवक्ता नोटिस पर भी मांगे मूल रिकॉर्डबचाव-पत्र में परिवाद में उल्लिखित 07 सितंबर 2025 की कथित थाना शिकायत तथा 10 सितंबर 2025 के कथित अधिवक्ता नोटिस एवं 15 सितंबर 2025 की कथित सेवा/प्राप्ति के संबंध में भी आपत्ति दर्ज की गई है।
चौधरी ने संबंधित पुलिस शिकायत, रोजनामचा/कार्यवाही, नोटिस की मूल या प्रमाणित प्रति तथा सेवा/प्राप्ति के प्रमाण को आवश्यकतानुसार रिकॉर्ड पर बुलाए जाने की मांग की है।BNS धारा 356 के आवश्यक तत्वों के परीक्षण की मांगउदय चौधरी ने अपने जवाब में मानहानि के आरोप के संदर्भ में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 के आवश्यक तत्वों तथा लागू अपवादों पर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया है।
उनका कहना है कि यदि कथित सामग्री किसी सार्वजनिक प्रश्न, प्रशासनिक कार्यवाही अथवा जनहित से संबंधित तथ्य या सद्भावना से व्यक्त मत से जुड़ी है, तो उसे उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। 7 आरोपों का बिंदुवार जवाबचौधरी ने परिवादी के सात प्रमुख आरोपों पर अलग-अलग जवाब प्रस्तुत किया है। उनका मुख्य रुख है कि कथित सोशल मीडिया सामग्री, कथित प्रकाशन, आरोपी से संबंध, कथित मानसिक मंशा तथा प्रतिष्ठा को हुई कथित क्षति—इन सभी पहलुओं को प्रमाणित किया जाना आवश्यक है।उन्होंने यह भी कहा है कि सामान्य एवं निष्कर्षात्मक आरोपों के बजाय प्रत्येक कथित पोस्ट अथवा लेख का अलग-अलग विवरण न्यायालय के समक्ष स्पष्ट होना चाहिए।
Party-in-Person के रूप में पैरवी की अनुमतिउदय चौधरी ने न्यायालय से स्वयं Party-in-Person के रूप में अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा है कि वे न्यायालय की गरिमा एवं प्रक्रिया का पालन करते हुए स्वयं अपना बचाव प्रस्तुत करना चाहते हैं तथा आवश्यक आवेदन, दस्तावेज एवं साक्ष्य संबंधी कार्यवाही में विधि के अनुसार भाग लेना चाहते हैं।
न्यायालय से प्रमुख मांगेंउदय चौधरी ने अपने विस्तृत जवाब में मुख्य रूप से—1. लिखित जवाब/आपत्ति को न्यायालयीन रिकॉर्ड पर लेने,2. Party-in-Person के रूप में स्वयं पैरवी की अनुमति देने,3. कथित सोशल मीडिया सामग्री के मूल रिकॉर्ड एवं इलेक्ट्रॉनिक स्रोत की जांच,4. कथित पुलिस शिकायत एवं संबंधित अभिलेख बुलाने,5. कथित अधिवक्ता नोटिस एवं सेवा के प्रमाण की जांच,6. आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों की प्रमाणिकता परखने,7. परिवादी एवं गवाहों से विधि अनुसार जिरह का अवसर देने,8. मानहानि के आरोप के सभी आवश्यक वैधानिक तत्वों का परीक्षण करने तथा9. पर्याप्त कानूनी आधार नहीं पाए जाने की स्थिति में लागू प्रावधानों के अनुसार उचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया है।
उदय चौधरी ने कहा—> “मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं है। मैं चाहता हूं कि जिन कथित पोस्ट, संदेश या सामग्री को मेरे विरुद्ध आधार बनाया गया है, उनका मूल रिकॉर्ड, पूरा संदर्भ और मेरे साथ उनका संबंध प्रमाणित किया जाए। मामले का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए।”मामला न्यायालय में विचाराधीनयह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
इस प्रेस विज्ञप्ति में प्रस्तुत तथ्य उदय चौधरी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत लिखित जवाब एवं उनके पक्ष पर आधारित हैं। परिवादी अभिषेक सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता अथवा असत्यता पर कोई निष्कर्ष यहां नहीं दिया जा रहा है। मामले में अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों एवं लागू कानून के आधार पर किया जाना है।
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कटघोरा | कोरबा | छत्तीसगढ़ संपादक: उदय चौधरी दिनांक: 10 अगस्त 2026फोटो कैप्शन:कटघोरा न्यायालय में विचाराधीन परिवाद मामले में अपना लिखित बचाव-पत्र प्रस्तुत करने वाले उदय चौधरी। हेडलाइन विकल्प:“मानहानि परिवाद में उदय चौधरी का विस्तृत पलटवार, मूल सोशल मीडिया रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की जांच की मांग”
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

