कटघोरा न्यायालय में Party-in-Person के रूप में लिखित जवाब पेश | सोशल मीडिया पोस्ट की तारीख, मूल कंटेंट, अकाउंट और आरोपी से संबंध का प्रमाण मांगा
कटघोरा/कोरबा। सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक एवं मानहानिकारक पोस्ट प्रकाशित करने के आरोप से जुड़े परिवाद प्रकरण क्रमांक 65/2026 में आरोपी उदय चौधरी ने कटघोरा न्यायालय के समक्ष अपना बिंदुवार लिखित जवाब एवं प्रारंभिक आपत्ति प्रस्तुत की है। चौधरी ने परिवादी सुशील तिवारी द्वारा लगाए गए सात प्रमुख आरोपों का खंडन करते हुए कथित सोशल मीडिया सामग्री के मूल स्रोत, प्रमाणिकता और उनके साथ संबंध स्थापित करने वाले साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने की मांग की है।
“आरोप लगाना अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं”न्यायालय में प्रस्तुत लिखित जवाब में उदय चौधरी ने प्रारंभिक आपत्ति लेते हुए कहा कि किसी परिवाद में आरोप लगाए जाने मात्र से आरोपी के विरुद्ध अपराध स्वतः सिद्ध नहीं हो जाता। उनके अनुसार मानहानि के मामले में कानून में निर्धारित प्रत्येक आवश्यक तत्व को परिवादी द्वारा विधि के अनुसार स्थापित किया जाना आवश्यक है।
चौधरी ने कहा कि यदि किसी लेख, पोस्ट या कथन को मानहानिकारक बताया जा रहा है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तव में कौन-सा कथन, किस तारीख को, किस माध्यम से और किस अकाउंट से प्रकाशित हुआ तथा उससे कथित रूप से प्रतिष्ठा किस प्रकार प्रभावित हुई। सोशल मीडिया पोस्ट पर उठाए अहम सवाल
उदय चौधरी ने कथित फेसबुक, इंस्टाग्राम, मोबाइल मैसेज और अन्य सोशल मीडिया सामग्री को लेकर कई सवाल उठाए हैं।उन्होंने न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट करने की मांग की है कि—- कथित पोस्ट की तारीख क्या है?- पोस्ट का पूरा मूल पाठ क्या है?- पोस्ट किस अकाउंट से प्रकाशित हुई?- संबंधित अकाउंट किसके नाम पर है?- अकाउंट के आरोपी द्वारा संचालित होने का क्या प्रमाण है?- कथित पोस्ट का मूल URL/लिंक क्या है?- पोस्ट किन-किन लोगों तक पहुंची?- पोस्ट का कौन-सा वाक्य मानहानिकारक है?- कथित सामग्री से परिवादी की प्रतिष्ठा वास्तव में किस प्रकार प्रभावित हुई?चौधरी ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रामाणिकता, स्रोत, अखंडता और आरोपी से उसके संबंध का विधि के अनुसार परीक्षण किए जाने की मांग की है।
“स्क्रीनशॉट से ही प्रकाशक साबित नहीं होता”
उदय चौधरी का कहना है कि केवल स्क्रीनशॉट अथवा प्रिंटआउट प्रस्तुत कर देने से यह स्वतः साबित नहीं हो जाता कि संबंधित सामग्री उन्हीं द्वारा प्रकाशित की गई थी। उन्होंने कथित इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के मूल रिकॉर्ड और उसके स्रोत को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की मांग की है। उनके अनुसार सोशल मीडिया सामग्री को उसके पूरे संदर्भ में देखना जरूरी है। किसी पोस्ट की केवल एक पंक्ति या शीर्षक को अलग करके निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
‘ईर्ष्या’ के आरोप पर भी मांगा ठोस प्रमाण
परिवाद में उदय चौधरी पर परिवादी की उन्नति एवं सामाजिक प्रतिष्ठा से ईर्ष्या रखने तथा उसकी एवं उसके मित्रों की प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास करने का आरोप लगाए जाने का भी चौधरी ने खंडन किया है।उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के मन में कथित “ईर्ष्या की भावना” होने का निष्कर्ष केवल अनुमान के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके समर्थन में विशिष्ट घटना, तारीख, दस्तावेज अथवा स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है।
07 सितंबर की पुलिस शिकायत पर भी आपत्तिपरिवाद में वर्णित 07 सितंबर 2025 की कथित पुलिस शिकायत को लेकर उदय चौधरी ने कहा है कि पुलिस में शिकायत किया जाना और शिकायत में लगाए गए आरोपों का न्यायालय में सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने उक्त शिकायत की प्रमाणित प्रति, पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही तथा उनके कथित बयान/आश्वासन की प्रमाणित प्रति रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किए जाने की मांग की है। 10 सितंबर के अधिवक्ता नोटिस को लेकर क्या कहा ? 10 सितंबर 2025 के कथित अधिवक्ता नोटिस के संबंध में चौधरी ने कहा कि किसी कानूनी नोटिस का प्राप्त होना उसमें लगाए गए आरोपों की स्वीकृति नहीं माना जा सकता।
उन्होंने नोटिस की प्रमाणित प्रति, उसकी सेवा का प्रमाण और नोटिस प्राप्त होने के बाद प्रकाशित की गई कथित सामग्री की तारीख एवं मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की मांग की है।प्रतिष्ठा को नुकसान के दावे पर भी सवालउदय चौधरी ने परिवादी के इस दावे का भी खंडन किया है कि कथित सोशल मीडिया सामग्री से उसकी प्रतिष्ठा एवं मान-सम्मान धूमिल हुआ।
उनका कहना है कि केवल यह कहना कि किसी व्यक्ति को किसी कथन से बुरा लगा अथवा उसने स्वयं को अपमानित महसूस किया, अपने आप में आपराधिक मानहानि के सभी आवश्यक तत्व स्थापित नहीं करता।उनके अनुसार यह भी परीक्षण का विषय है कि कथित कथन से अन्य व्यक्तियों की दृष्टि में परिवादी की प्रतिष्ठा वास्तव में किस प्रकार कम हुई।
BNS धारा 356 के अपवादों का दिया हवालालिखित जवाब में उदय चौधरी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 का उल्लेख करते हुए कहा है कि मानहानि के आरोप का परीक्षण करते समय कानून में निर्धारित अपवादों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि कोई कथन वास्तविक घटना, सार्वजनिक विषय, प्रशासनिक कार्यवाही अथवा जनहित से जुड़े मुद्दे पर तथ्यात्मक सामग्री अथवा सद्भावना से व्यक्त राय से संबंधित हो तो उसे उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए।“हर कथित पोस्ट का अलग-अलग विवरण दें”परिवाद में आरोपी द्वारा
“बार-बार” अथवा “लगातार” कथित आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने के आरोप पर भी चौधरी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कथित पोस्ट/लेख के लिए अलग-अलग—तारीख + पूरा मूल कंटेंट + प्रकाशन माध्यम + अकाउंट + URL + आरोपी से संबंध का प्रमाण + कथित दर्शक + प्रतिष्ठा को हुई कथित क्षति का आधारस्पष्ट किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार सामान्य एवं अस्पष्ट आरोपों से आरोपी को प्रभावी बचाव का पूरा अवसर नहीं मिल सकता। गवाहों की विश्वसनीयता पर भी रहेगा फोकसपरिवादी द्वारा प्रस्तुत गवाहों के संबंध में उदय चौधरी ने कहा कि उन्हें गवाहों के प्रत्यक्ष ज्ञान, कथनों की सत्यता और विश्वसनीयता को विधि के अनुसार जिरह के माध्यम से परखने का अधिकार है।
सोशल मीडिया संबंधी गवाह से यह स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता बताई गई है कि उसने कथित पोस्ट कब, किस डिवाइस पर और किस अकाउंट से देखी तथा क्या वह यह प्रमाणित कर सकता है कि संबंधित अकाउंट आरोपी द्वारा ही संचालित किया जा रहा था।
न्यायालय से की 9 प्रमुख मांगेंउदय चौधरी ने न्यायालय से अपने लिखित जवाब को रिकॉर्ड पर लेने के साथ स्वयं Party-in-Person के रूप में अपना बचाव प्रस्तुत करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। इसके अलावा उन्होंने कथित सोशल मीडिया सामग्री की पूर्ण एवं मूल प्रति, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की प्रमाणिकता और स्रोत का परीक्षण, पुलिस शिकायत एवं अधिवक्ता नोटिस से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने तथा परिवादी एवं उसके गवाहों से विधि के अनुसार जिरह का अवसर देने की मांग की है।
उन्होंने न्यायालय से यह भी अनुरोध किया है कि BNS धारा 356 के प्रत्येक आवश्यक तत्व का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जाए और यदि परिवादी द्वारा प्रस्तुत सामग्री से उनके विरुद्ध पर्याप्त कानूनी आधार स्थापित नहीं होता है तो लागू प्रावधानों के अनुसार उचित आदेश पारित किया जाए।
उदय चौधरी का पक्ष – उदय चौधरी के अनुसार, उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति की निजी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपने अनुभव, उपलब्ध दस्तावेजों और सार्वजनिक महत्व से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखना था। उन्होंने कहा कि वे अपने पक्ष को मूल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय के समक्ष स्पष्ट करने के लिए तैयार हैं।“मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं है। मैं चाहता हूं कि जिन पोस्टों को आधार बनाया गया है, उनका मूल रिकॉर्ड, पूरा संदर्भ और मेरे साथ उनका संबंध प्रमाणित किया जाए तथा मामले का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर हो।”
— उदय चौधरी—मामला न्यायालय में विचाराधीन
यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। उपरोक्त बातें आरोपी उदय चौधरी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत लिखित जवाब एवं उनके पक्ष पर आधारित हैं। परिवादी सुशील तिवारी द्वारा लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानून के आधार पर निर्धारित किया जाना है।
नवा छत्तीसगढ़ न्यूज़ इस मामले में दोनों पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी निष्पक्षता से प्रकाशित करेगा।—📰 नवा छत्तीसगढ़ न्यूज़ MSME Reg. No.: UDYAM-CG-10-0027428 कटघोरा |
Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

