देश में जमीनी विवादों के निपटारे की वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। तहसीलदार एवं एसडीएम, जो मूलतः राजस्व प्रशासन के अधिकारी हैं, उन्हें अनेक मामलों में न्यायिक अधिकार देकर ऐसे दायित्व सौंपे गए हैं जिनके लिए विशेष न्यायिक प्रशिक्षण आवश्यक होता है। यही दोहरी भूमिका आज विवादों, असंतोष और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को जन्म दे रही है।
यह तथ्य सामने आ रहा है कि जमीनी विवादों में आम नागरिकों को निष्पक्ष और समयबद्ध न्याय नहीं मिल पा रहा है। एक ओर पुलिस ऐसे मामलों में हस्तक्षेप से बचते हुए उन्हें “सिविल प्रकृति” का बताकर आगे बढ़ा देती है, वहीं दूसरी ओर संबंधित पक्षों को तहसीलदार और एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत होना पड़ता है, जहां पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली एवं निर्णय प्रक्रिया में मूलभूत अंतर होता है। जब विधिक रूप से प्रशिक्षित वकील अपनी दलील ऐसे अधिकारियों के समक्ष रखते हैं जिनकी शिक्षा न्यायिक नहीं है, तो न्यायिक गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
आरोप यह भी सामने आ रहे हैं कि अधिकारियों से सीधे संपर्क की सहजता के कारण प्रभावशाली एवं आर्थिक रूप से सक्षम पक्ष निर्णयों को प्रभावित करने की स्थिति में आ जाते हैं, जबकि कमजोर वर्ग न्याय के लिए भटकता रह जाता है। इससे समाज में असंतोष, अविश्वास और पारिवारिक विवादों में वृद्धि देखी जा रही है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए निम्न मांगें प्रमुख रूप से उठाई जा रही हैं:
1. जमीनी विवादों के निपटारे हेतु केवल न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए।
2. तहसीलदार एवं एसडीएम की न्यायिक शक्तियों की समीक्षा कर उन्हें सीमित किया जाए।
3. राजस्व न्यायालयों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
4. गरीब एवं वंचित वर्ग को सुलभ, किफायती और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं।
यह समय की मांग है कि न्याय व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि आम नागरिकों का विश्वास पुनः स्थापित हो सके। यदि इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जमीनी विवादों के कारण सामाजिक तनाव और बढ़ सकता है।
“न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।”
जारीकर्ता: उदय चौधरी
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Uday Kumar serves as the Editor of Nawa Chhattisgarh, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

